ब्रह्मविद्या अध्ययन

सनातन धर्म का विद्यावैभव

अभ्यासक्रम

सनातन वैदिक धर्म का ज्ञान-भण्डार वेद, उपनिषद्, श्रीमद्भगवद्गीता, रामायण, महाभारत, पुराणों तथा अन्य प्राचीन ग्रंथों में सुरक्षित है। भगवान के अवतारों, ऋषियों, आचार्यों, संतों और भक्तों ने अपने जीवन, उपदेश एवं साधना द्वारा इस ज्ञान-परंपरा का संरक्षण, संवर्धन और प्रसार किया है। यही अखण्ड परंपरा भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता की आधारशिला है। यह ज्ञान मनुष्य को आध्यात्मिक उन्नति के साथ धर्ममय, विवेकपूर्ण एवं लोकमंगलकारी जीवन जीने की प्रेरणा देता है। ब्रह्मरूप होकर परब्रह्म की उपासना एवं भक्ति का अधिकारी बनने की दिशा में यह ज्ञान मार्गदर्शक है।

ब्रह्मविद्या अध्ययन’ इसी दिव्य ज्ञान को सरल, सुबोध एवं क्रमबद्ध रूप में जन-जन तक पहुँचाने का एक प्रयास है।

इसके अंतर्गत एक-एक वर्ष के स्वतंत्र अभ्यासक्रम विकसित किए गए हैं, जिन्हें विद्यार्थी अपनी रुचि एवं सुविधा के अनुसार किसी भी क्रम से अध्ययन कर सकते हैं।

ब्रह्मविद्या अध्ययन : सनातन धर्म का विद्यावैभव’ अभ्यासक्रम भारतीय ज्ञान-परंपरा की आध्यात्मिक एवं लौकिक दोनों धाराओं का परिचय कराता है। इसमें वेद, वेदान्त, दर्शन, इतिहास एवं पुराणों के साथ-साथ गणित, खगोलशास्त्र, आयुर्वेद, भाषाविज्ञान, अर्थशास्त्र, राजनीति, कृषि, स्थापत्य, शिल्प, रसायन, संगीत, नृत्य तथा अन्य प्रमुख विद्याओं का परिचय दिया गया है।

साथ ही, भारतीय ऋषियों एवं आचार्यों की बौद्धिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक उपलब्धियों तथा मानव सभ्यता में उनके योगदान का समग्र अध्ययन कराया जाएगा।

यह अभ्यासक्रम भारतीय ज्ञान-परंपरा की एकात्म दृष्टि को समझने, अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति श्रद्धा एवं गौरव विकसित करने तथा सनातन धर्म के विविध शास्त्रों एवं विद्याओं के गहन अध्ययन के लिए प्रेरित करने का माध्यम है।

इस अभ्यासक्रम शृंखला में

  • परा विद्या एवं अपरा विद्या की अवधारणा तथा उनके परस्पर संबंध को समझेंगे।
  • वेद, वेदाङ्ग, दर्शन, इतिहास, पुराण तथा अन्य प्राचीन ग्रंथों के ज्ञान-वैभव को समझेंगे।
  • सनातन ज्ञान-परंपरा में अध्यात्म, विज्ञान, समाज, संस्कृति एवं नैतिकता के समन्वित दृष्टिकोण का अध्ययन करेंगे।
  • प्राचीन भारत की आध्यात्मिक, वैज्ञानिक, दार्शनिक एवं सांस्कृतिक उपलब्धियों का सम्यक् मूल्यांकन करेंगे।
  • भारतीय ज्ञान-विज्ञान की विशिष्ट उपलब्धियों से परिचित होंगे।
  • भारतीय ऋषियों, आचार्यों, संतों एवं विद्वानों के मानव सभ्यता में योगदान का यथार्थ परिचय प्राप्त कर सकेंगे।
  • अपनी सांस्कृतिक एवं बौद्धिक विरासत के प्रति गौरव, श्रद्धा एवं आत्मविश्वास का विकास कर सकेंगे।

इन सभी जिज्ञासाओं का समाधान इस सुआयोजित अभ्यासक्रम शृंखला में हमें प्राप्त होगा।

प्रस्तुतकर्ता

BAPS स्वामिनारायण शोध संस्थान, स्वामिनारायण अक्षरधाम, नई दिल्ली

भारत की राजधानी नई दिल्ली में स्वामिनारायण अक्षरधाम का सृजन करके ब्रह्मस्वरूप प्रमुखस्वामीजी महाराज ने सनातन धर्म की पताका समग्र विश्व के पटल पर फहराई है। स्वामिनारायण अक्षरधाम के भव्य संकुल में ही उन्होंने समग्र विश्व के ज्ञान पिपासुओं के लिए ‘BAPS स्वामिनारायण शोध संस्थान’ की स्थापना की है, जहाँ से सनातन वैदिक ज्ञान के उत्कर्ष के लिए अनेकविध प्रवृत्ति का संचालन होता है। प्रकट ब्रह्मस्वरूप महंतस्वामीजी महाराज की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से इस अभ्यासक्रम का प्रारम्भ BAPS स्वामिनारायण शोध संस्थान, नई दिल्ली के द्वारा हुआ है।

कार्यक्रम

इस अभ्यासक्रम के दो सत्र रहेंगे। प्रत्येक महीने की दिनांक 1, 11 और 21 को अभ्यास वर्ग का विडियो अपलोड किया जायेगा, जिसे आप अपने समय की अनुकूलता के अनुसार देख सकेंगे। साथ में, उस वर्ग का अभ्यास साहित्य pdf के रूप में अपलोड होगा। स्वमूल्यांकन के लिए, प्रत्येक वर्ग के साथ प्रश्नमाला भी अपलोड होगी। प्रत्येक सत्र के अन्त में ऑनलाइन कसौटी होगी, जिसमें बहुवैकल्पिक (MCQ) प्रश्न पूछे जायेंगे।

अभ्यासक्रम के विषय

सत्र १ : सनातन धर्म की अपराविद्या

अभ्यासक्रम की सामग्री

वीडियो व्याख्यान
वीडियो व्याख्यान
अभ्यासक्रम नोंध
अभ्यासक्रम साहित्य
प्रश्न बैंक
प्रश्न बैंक
स्वमूल्यांलन परीक्षा
स्वमूल्यांलन परीक्षा
सत्रांत परीक्षा
सत्रांत परीक्षा

सत्र २ : सनातन धर्म की पराविद्या

अभ्यासक्रम की सामग्री

वीडियो व्याख्यान
वीडियो व्याख्यान
अभ्यासक्रम नोंध
अभ्यासक्रम साहित्य
प्रश्न बैंक
प्रश्न बैंक
स्वमूल्यांलन परीक्षा
स्वमूल्यांलन परीक्षा
सत्रांत परीक्षा
सत्रांत परीक्षा

प्रमाणपत्र

अभ्यासक्रम के प्रत्येक सत्र के बाद छात्रों की सत्रांत परीक्षा ली जायेगी | इस परीक्षा में उत्तीर्ण छात्रों को BAPS स्वामिनारायण शोध संस्थान के द्वारा अभ्याक्रम की समाप्ति के बाद ऑनलाइन प्रमाणपत्र दिया जायेगा | परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए न्यूनतम 50% अंक प्राप्त करने आवश्यक है | 90%, 80% या 70% से अधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्रों को क्रमशः विशेष योग्यता, प्रथम श्रेणी तथा द्वितीय श्रेणी का प्रमाणपत्र प्राप्त होगा |

अभ्यासक्रम में जुड़ने के लिए योग्यता

18 वर्ष से अधिक आयु वाले प्रत्येक व्यक्ति इस अभ्यासक्रम में प्रतिभागी बन सकते हैं।

अभ्यासक्रम की पूर्णता के लिए आवश्यकता

विद्यार्थी प्रत्येक वर्ग  की विडियो को देखे और अभ्यास साहित्य का पठन करें। प्रत्येक सत्र के अंत में सत्रांत परीक्षा होगी । सत्रांत परीक्षा में प्राप्त औसत गुणों के आधार पर ग्रेड प्राप्त होगा । अभ्यासक्रम पूर्ण करने के लिए औसत गुणों का 50% से अधिक होना आवश्यक है।

अभ्यासक्रम की पूर्णता के लिए आवश्यकता

विद्यार्थी प्रत्येक वर्ग  की विडियो को देखे और अभ्यास साहित्य का पठन करें। प्रत्येक सत्र के अंत में सत्रांत परीक्षा होगी । सत्रांत परीक्षा में प्राप्त औसत गुणों के आधार पर ग्रेड प्राप्त होगा । अभ्यासक्रम पूर्ण करने के लिए औसत गुणों का 50% से अधिक होना आवश्यक है।

आवेदन प्रक्रिया

पाठ्यक्रम आवेदन

ऑनलाइन फॉर्म भरकर पाठ्यक्रम में आवेदन करें।

भुगतान

पाठ्यक्रम का भुगतान ऑनलाइन पूरा करें।

अपना कोर्स शुरू करें

एक बार भुगतान की पुष्टि हो जाने के बाद आप स्वतः ही पाठ्यक्रम में नामांकित हो जाएँगे।

शुल्क

₹ 1,000

अप्रतिदेय (Non-Refundable)

इस एक वर्षीय अभ्याक्रम का शुल्क रु. 1000 अप्रतिदेय (Non-Refundable) है |

इस कोर्स के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू है।
रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया ३१ अगस्त २०२६ तक शुरू रहेगी।
कोर्स का आरंभ १ सितम्बर २०२६ से होगा।

संपर्क

यदि आप कोर्स में रुचि रखतें हैं, आपको कोर्स संबंधित प्रश्न हैं अथवा आपको कोई तकनीकी सहायता की आवश्यकता है, तो कृपया FAQs विभाग पर जाऍं या [email protected] पर हमारे Support Team का संपर्क करें।

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